Animal movie review: बदले की आग और हिंसा की भरमार दिखाती एनिमल

Animal movie review: बदले की आग और हिंसा की भरमार दिखाती एनिमल

Animal movie review: टीज़र से लेकर ट्रेलर धमाल मचाने वाली रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ अब बड़े परदे पर रिलीज़ हो चुकी है, हर दिन हज़ारों की तादाद में लोग इसे देखने जा रहे हैं, सिनेमाघरों में फिल्म के शोज हॉउसफुल जा रहे हैं और लोगों से फिल्म को अच्छी-बुरी दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, लेकिन फिल्म को मिलने वाली अच्छी प्रतिक्रियाओं की संख्या बुरी की तुलना में ज्यादा है।

इस ब्लॉग में हम फिल्म की कहानी के साथ फिल्म से जुड़े उन पहलुओं के बारे में बात करेंगे जो मेकर्स ने फिल्म के जरिये समाज को दिखाने की कोशिश की है साथ ही उन पहलुओं को भी जो मेकर्स ने फिल्म में दिखाएँ हैं लेकिन क्या एक समाज के रूप में हम इस प्रकार के टॉक्सिक या अमानवीय व्यवहार वाले व्यक्तित्व को हम अपना पाएंगे।

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Animal movie review
Movie Reviewएनिमल
कलाकाररणबीर कपूर , रश्मिका मंदाना , बॉबी देओल , तृप्ति डिमरी , सुरेश ओबेरॉय , शक्ति कपूर और अनिल कपूर
लेखकसंदीप रेड्डी वंगा , प्रणय रेड्डी वंगा और सौरभ गुप्ता
निर्देशकसंदीप रेड्डी वंगा
निर्माताभूषण कुमार , मुराद खेतानी , कृष्ण कुमार और प्रणय रेड्डी वंगा
रिलीज1 दिसंबर 2023
रेटिंग
★★★★☆

Animal movie Review: ‘एनिमल’ की कहानी

खैर बात फिल्म की कहानी से करते हैं। तो ये कहानी एक जुनूनी बेटे रणविजय(रणबीर कपूर)की कहानी है जो अपने पिता से बेइन्तेहाँ प्यार करता है और बदले में किसी भी हाल में चाहता है कि पिता भी उस से इतना ही प्यार करें, रणविजय के पिता बलबीर सिंह(अनिल कपूर) काम में व्यस्त होने के चलते अपने परिवार को समय नहीं दे पाते और उनकी अनुपस्थिति में रणविजय जो उनसे काफी प्रभावित है उसे लगता है कि पिता के बाद वो ही अपने परिवार की सुरक्षा का उत्तरदायी है और इस बात का पता हमें एक कॉलेज सीन के दौरान चलता है।

जब रणविजय अपनी बहन की क्लास में बन्दूक लेकर पहुँच जाता है और गोलियों की बरसात करना शुरू कर देता है और उसके इसी कृत्य से नाराज होकर रणविजय के पिता उसे हॉस्टल भेज देते हैं, हॉस्टल में रणविजय को गीतांजलि(रश्मिका मंदाना) से प्यार हो जाता है और वे शादी कर लेते हैं,

लगभग आठ साल बाद रणविजय अपने घर लौटता है जहाँ पहुंचकर उसे पता चलता है कि उसके पिता पर किसी ने जानलेवा हमला किया था और यहीं से आता है कहानी में ट्विस्ट… बॉलीवुड का वही ट्विस्ट जो हर बाप बेटे की कहानी में होता है यानी बदले का ट्विस्ट, रणविजय किसी भी हालत में अपने पिता पर हमला करवाने वाले आदमी के पास पहुंचना चाहता है जिसके लिए वो क्या करता है क्या नहीं ये फिल्म देखकर ही आप लोग जान पाएंगे।

फिल्म में रणबीर का अभिनय शानदार है, और बॉबी देओल ने भी फिल्म में अपने अभिनय का लोहा मनवा दिया है, अनिल कपूर ने एक पिता के रूप में अपने रोल के साथ न्याय किया है। रश्मिका मंदाना और तृप्ति डिमरी ने अपनी भूमिकाओं को बखूबी परदे पर उकेरा है, फिल्म के सभी किरदार अपने रोल में जचे हैं, शायद ये ही वजह रही कि फिल्म को बुरी की तुलना में अच्छी प्रतिक्रिया ज्यादा मिल रही हैं।

फिल्म की कहानी का प्लाट पुराना है पर निसंदेह बहुत अच्छा है, फिल्म थोड़ी लम्बी होने के बावजूद आपको उबाऊ नहीं लगती, लोगों की प्रतिक्रिया की बात करें तो वे इसे एक अच्छा one time watch ऑप्शन कह रहे हैं।

‘एनिमल’ का ट्रेलर

Animal movie trailer

अब बात करते हैं फिल्म के उन पहलुओं की जो मेकर्स ने फिल्म के जरिये दिखाने की कोशिश की है, ट्रेलर में फिल्म का एक सीन रिलीज़ किया गया था यानी बाप बेटे वाला सीन जब रणबीर यानी रणविजय अपने पिता बलबीर से कहता है पापा चलिए एक रोल प्ले करते हैं आपको बस पापा-पापा बोलना है और मैं आपका रोल करूँगा.

सच कहूं तो वो सीन इस पूरी फिल्म की जान है आप उस सीन में बहुत ज्यादा इमोशनल महसूस करेंगे, और अगर आप पेरेंट्स हैं तो आप जान पाएंगे कि कैसे जब आप अपने बच्चे की बात नहीं सुनते, तो ये जो आज आपके लिए जरा सी बात है वो जरा सी बात आपके बच्चे के दिलो-दिमाग पर क्या असर डालती है।

‘एनिमल’ मूवी रिव्‍यू

इस फिल्म के जरिये मेकर्स बाप बेटे के उस रिश्ते के बारे में बताना चाहते हैं जो अक्सर हम अपने घरों में या अपने चारों ओर देखते हैं। पिता-पुत्र का रिश्ता अमूमन ज्यादा अच्छा नहीं होता एक वक्त के बाद या स्पष्ट तौर पर किशोरावस्था के दौरान लड़कों में खासकर घरवालों से अपनी बातें न साझा कर पाने की प्रवर्ति देखी जाती है और जो बड़े होने के साथ-साथ और गहरी होती जाती है और

Animal movie review

जो बच्चा आज अपने माता-पिता से समय की मांग कर रहा है वो कल पिता बनने के बाद अपने बच्चों से वैसा ही व्यवहार करता है, इसलिए कहा जाता है कि आप अपने बच्चों के सामने जैसा बर्ताव करेंगे वो भी वैसा ही सीखेंगे।

मनोचिकत्स्कों की माने तो जब किसी बच्चे की बात को अनसुना किया जाता है या फिर उसके साथ हिंसात्मक रवैया अपनाया जाता है तो इस का असर दिमाग पर उतना ही गहरा रहता है जितना शरीर के किसी अंग पर गोली लगने जैसा होता है, घाव शायद भर भी जाएँ पर निशान रह जाते हैं। शायद ये ही कारण रहा कि फिल्म में रणविजय एक जानवर से बदतर इंसान बन गया।

फिल्म मूल रूप से एक हिंसात्मक फिल्म है, जिसमें हिंसा की भरमार है, इस फिल्म में गोलियां चल नहीं रही बल्कि ऐसा लगता है मानों बरस रही हैं, और यही बात है जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देगी क्या बॉलीवुड ऐसे हीरो दिखाना चाहता है, क्या हीरो की परिभाषा अब बदल रही है, टॉक्सिक व्यव्हार, बीवी के साथ गन्दी तरह से बात करना ये कहना कि “तुम्हें यहां महीने में चार बार पैड बदलने पड़ते हैं तो तुम्हारे इतने नाटक हैं, मैं यहां रोज़ पचास बदल रहा हूँ..”

यहां हीरो का अपनी बीवी अपने बच्चों की माँ से ये कहना कि वो पीरियड्स में सिर्फ चार दिन दर्द झेलती है उसका नाटक करना सही नहीं है, एक तरह से ये उस टॉक्सिक सोच को दिखाता है जो आज भी हमारे देश के कई युवाओं को प्रभावित करती है, जहाँ लडककियों के मासिक धर्म को कहीं तो एक टैबू माना जाता है तो कभी उनका मजाक उड़ाया जाता है, उन्हें यह फील कराया जाता है कि इस से क्या ही फर्क पड़ता है?

पता नहीं क्यों फिल्म में हर कदम पर रणविजय के इस व्यव्हार को जस्टिफाई करने की कोशिश की गयी है। लेकिन ऐसा बॉलीवुड में पहली बार नहीं हो रहा है इस से पहले भी संदीप रेड्डी वांगा अपनी फिल्म कबीर सिंह में भी इस तरह के व्यव्हार वाले हीरो को दिखा चुके हैं जो बहुत टॉक्सिक होता है, असहनीय होता है पर उसे सराहा जाता है। संदीप रेड्डी वांगा ही एनिमल के निर्देशक भी हैं और उन्होंने अपनी इस बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर में भी टॉक्सिक व्यवहार को “बदले” का रूप देकर जस्टिफाई कर दिया है।

लेकिन सवाल वही का वही है क्या हमें ऐसे हीरो चाहिए..? तो इस सवाल पर शायद मेकर्स बोलें कि ये महज एक फिल्म है, अभिव्यक्ति की आज़ादी का जीता जागता हुआ स्वरुप है लेकिन सवाल फिर वही क्या यह फिल्म एक गलत उदाहरण सेट नहीं कर रही है? क्या युवा इस से प्रभावित होकर हिंसा को नहीं अपनाएंगे? दरअसल फिल्में समाज का प्रतिबिम्ब होती हैं लेकिन समय के साथ ये क्रिया अब दोनों ओर से संचालित हो रही हैं, अब समाज भी फिल्मों का प्रतिबिम्ब बन रहा है।

ऐसे कितने ही आपराधिक मामले सामने आते हैं जिनमें अपराध करने वाला व्यक्ति किसी फिल्म से प्रभावित होकर अपराध की राह चुनता है। और फिल्म में जो भी सेक्स सीन्स,हिंसा के दृश्य या घरेलु कलहों को दिखाया गया है कम से कम वो हमारे समाज का प्रतिबिम्ब नहीं बनना चाहिए। यह एक विचारणीय विषय है।

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‘एनिमल’ ने वर्ल्डवाइड किया 300 करोड़ा का आंकड़ा पार फिल्म की वर्ल्डवाइड कमाई की बात करें तो इसने तीन दिनों में 356 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली है

बहरहाल अगर आपको बॉलीवुड तड़के के साथ एक्शन और हल्की रोमेंटिक फिल्म पसंद है तो आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।

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