चौंकिए मत: कतई सत्य है, बीमार और बांझपन की ​शिकार गाय भी बनेंगी मां

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– केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की सफलता है परिणाम

मेरठ। बांझपन एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित गायों को अब बेसहारा छोड़ने की जरूरत नहीं है। ऐसी सभी गाय अब मां बन सकेंगी। इसपर केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने सफलता पा ली है। ऐसी गायों से पैदा होने वाली बछिया एक बियात में कम से कम तीन से चार हजार लीटर दूध देंगी। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि ऐसी गाय की कोख में भ्रूण डालकर बछिया पैदा की जा रही हैं। आने वाले समय में उन्नत किस्म की गायों की पैदावार बढ़ेगी। सांडों का वीर्य फलीकरण होगा।

केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेश कुमार डबास का कहना है कि पूरे देश में गायों में वि​भिन्न प्रकार की बीमारियों के कारण बाझपन बढ़ रहा है। जिसके कारण गोवंश की जन्म दर कम हो रही है और दुग्ध का उत्पादन भी गिरा है। किसान भी परेशान होकर ऐसी गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं। किसानों को आ​र्थिक नुकसान पहुंचता है। यही कारण है कि अ​धिकतर किसानों ने गायों का पालन कम कर दिया है। जिसको लेकर सरकार गंभीर है। ऐसी गाय मां बनें और दूध भी अ​धिक दें, इसको लेकर केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ में शोध किया गया। ऐसी गायों में साहीवाल सांड के बीर्य को साहीवाल गाय के गर्भ में डालकर फलीभूत किया गया। सातवें दिन भ्रूण को निकालकर बांझपन साहीवाल या अन्य उच्चकोटि की गायों में प्रत्योरोपण करते हैं। भ्रूण को प्रत्यारोपण करने से पहले उस गाय की बीमारियों का उपचार किया जाता है, जिनके गर्भ में भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाना है। वैज्ञानिक का कहना है कि संस्थान आने वाले समय में बड़ी संख्या में भ्रूण तैयार करके किसानों को भी निशुल्क देने का काम करेगा। ताकि किसान अपनी गायों को बेसहारा न छोड़ें। इसके बाद देश में दूध का उत्पादन बढ़ेगा।

मेरठ, उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव पांची में जन्मे और पले-बढ़े रोहित सैनी पेशे से इंजीनियर हैं, लेकिन उनका असली जुनून लोगों तक जानकारी पहुँचाना है। वो मानते हैं कि सीखना तभी आसान और असरदार होता है जब जानकारी अपनी ही भाषा में मिले। इसी सोच के साथ उन्होंने यह खास प्लेटफॉर्म बनाया, जहाँ जटिल से जटिल विषयों को आसान और साफ़ भाषा में समझाया जाता है—वो भी हिंदी में, ताकि हर कोई बिना किसी रुकावट के सीख सके।

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