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सत्य, सेवा, और भूख: लालबहादुर शास्त्री की अनसुनी कहानी

सत्य, सेवा, और भूख: लालबहादुर शास्त्री की अनसुनी कहानी

सन् 1965 में भारत पर अनाज का संकट पड़ गया था उस समय हमारे देश के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी थे।अमेरिका ने उस समय का फायदा उठाते हुए भारत को कुछ शर्तो के साथ अनाज देने की पेशकश की तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी जानते थे कि अमेरिका से अनाज लिया तो देश का स्वाभिमान चूर चूर हो जाएगा।

इसलिए लाल बहादुर शास्त्री जी ने अमेरिका के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया और उस रात वो उनकी पत्नी और बच्चे भूखे पेट ही सोए। इससे उन्हें यह विश्वास हो गया था कि अगर कोई व्यक्ति एक दिन कुछ न खाएं तो वह भूख बर्दाश्त कर सकता है।

सन् 1965 में भारत पर अनाज का संकट
लालबहादुर शास्त्री


परिवार के साथ इस प्रयोग के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश वासियों से एक दिन का उपवास रखने का आवाहन किया।

“हमें भारत का स्वाभिमान बनाए रखने के लिए देश में
उपलब्ध अनाज से ही काम चलाना होगा
हम किसी भी देश के आगे हाथ नहीं फैला सकते”

(-लाल बहादुर शास्त्री, तत्कालीन प्रधानमंत्री)

शास्त्री जी के इस आवाहन का देश वासियों पर गहरा असर पड़ा। देश वासियों ने बिना किसी झिझक अपने प्रधानमंत्री के इस आवाहन पर भरोसा किया और हर सप्ताह में एक वक्त का खाना छोड़ दिया।

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