Interesting Facts: जानिए कौन थी कार चलाने वाली दुनिया की पहली महिला? भारत में किसने की थी इसकी शुरुआत

Interesting Facts: जानिए कौन थी कार चलाने वाली दुनिया की पहली महिला? भारत में किसने की थी इसकी शुरुआत

दुनिया की पहली महिला जो कार चला सकी थीं, उनमें से एक नाम बेर्था बेंज का था। वे 1888 में अपनी एक शूटिंग ब्रेक इंजन वाली गाड़ी को सफलतापूर्वक चलाने वाली पहली महिला बन गई थीं।

बेर्था बेंज 22 मार्च, 1849 को जर्मनी के एलफेल्ड में पैदा हुईं थीं। उनके पिता जो एक ज्वेलर थे उन्हें घोड़े और गाड़ियों से बहुत प्यार था। जब उनकी उम्र 8 साल की थी तो उन्हें एक घोड़े का तोहफा दिया गया था। यह उनकी गाड़ी चलाने की प्रेरणा बनी।

1888 में उन्होंने शूटिंग ब्रेक इंजन वाली अपनी गाड़ी को सफलतापूर्वक चलाया था। यह इतिहास में महत्वपूर्ण घटना थी। बेर्था बेंज के इस कारनामे ने महिलाओं के लिए नये संभावनाओं की दुनिया खोल दी थी। अब महिलाएं भी गाड़ी चला सकती थीं।

बेर्था बेंज ने न केवल गाड़ी चलाने के मामले में इतिहास रचा, बल्कि वह एक सफल उद्यमी भी थीं। वह एक स्वतंत्र व्यवसायी बनकर अपनी खुद की कार कंपनी बनाई थीं। उन्होंने अपनी कंपनी के लिए नई-नई तकनीक विकसित की थीं जिससे उनकी कंपनी कारों के मामले में सफलता प्राप्त कर सके।

बेर्था बेंज ने अपने जीवन के अंतिम दिनों तक गाड़ियों के विकास में अपना योगदान दिया। उनकी मृत्यु 5 मई, 1943 को हुई थी।

भारत में भी कार चलाने वाली पहली महिला

भारत में भी कार चलाने वाली पहली महिला का नाम सरला ठाकुर है। वह अपनी ब्रिटिश शिक्षा पूरी करने के बाद भारत वापस आई थीं। वह चाय पे चर्चा में जाने के लिए खुद की कार से जाती थीं। उन्होंने उस समय भारत में चल रही सभी बाधाओं के बावजूद कार चलाने में सफलता प्राप्त की थी।

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सरला ठाकुर

इन महिलाओं के उत्साह, प्रेरणा और संघर्ष को देखते हुए हमें सोचना चाहिए कि कुछ असंभव लगने वाले काम भी हम कर सकते हैं। बस हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण गुणों को ध्यान में रखने से हम सफल हो सकते हैं। स्वतंत्रता, दृढ़ता, उत्साह और अध्यवसायता इसके उदाहरण हैं। हमें निरंतर सीखना चाहिए और अपनी सीमाओं के बाहर बढ़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।

अगर हम अपने सपनों को सच करना चाहते हैं, तो हमें एक सकारात्मक मानसिकता के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें यह याद रखना चाहिए कि हम कुछ भी संभव हैं। जब हम अपने सपनों के लिए काम करते हैं, तो न सिर्फ हम अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, बल्कि हम दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

इन महिलाओं की कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें अपनी मेहनत को नहीं छोड़ना चाहिए और संघर्ष करने से नहीं डरना चाहिए। हमें इन महिलाओं की तरह उच्च स्तर की उत्साह, संकल्प और सहनशीलता का उपयोग करके अपने सपनों को पूरा करने में सक्षम होना चाहिए।

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