Virtual RAM से कैसे बढ़ जाती है आपके फोन की रैम? समझें गणित

Virtual RAM से कैसे बढ़ जाती है आपके फोन की रैम? समझें गणित

Virtual RAM: आजकल के स्मार्टफोन में रैम की मात्रा एक महत्वपूर्ण फीचर है। रैम जितना ज्यादा होता है, फोन उतना ही Fast काम करता है। लेकिन, बजट स्मार्टफोन में अक्सर रैम की मात्रा कम होती है। ऐसे में, Virtual RAM एक अच्छा विकल्प है।

Virtual RAM क्या है?

Virtual RAM एक तकनीक है जो आपके फोन की इंटरनल स्टोरेज को रैम के रूप में इस्तेमाल करती है। जब आपके फोन की रैम भर जाती है, तो Virtual RAM का इस्तेमाल करके अतिरिक्त ऐप्स को स्टोर किया जाता है। जब आप उन ऐप्स को इस्तेमाल करते हैं, तो वे वर्चुअल रैम से लोड होते हैं। चलिए Virual RAM को वास्तविक दुनिया के उदाहरण से आशान शब्दों में समझते हैं।

Virtual RAM

उदाहरण: सोचो तुम एक किराने की दुकान हो, और लोग (apps) तुमसे सामान (data) खरीदने आते हैं. तुम्हारे पास एक छोटा काउंटर (physical RAM) है जहाँ तुम ताज़ा सामान (active data) रखते हो ताकि हर ग्राहक को जल्दी मिले. लेकिन ज़्यादा ग्राहक आने लगें तो क्या होगा? काउंटर छोटा पड़ जाएगा!

यहाँ Virtual RAM बचाव करने आता है. वो तुम्हारे पिछवाड़े (storage) में एक बड़ा गोदाम (swap space) बना देता है. अब जब काउंटर भरने लगे, तो कुछ कम इस्तेमाल होने वाले सामान (inactive data) गोदाम में भेज दिए जाते हैं. जरूरत पड़ने पर वो फिर जल्दी से काउंटर पर आ जाते हैं.

ज़रूर, गोदाम काउंटर जितना तेज़ नहीं, तो कभी-कभार थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन कुल मिलाकर, वर्चुअल RAM तुम्हारी दुकान (device) को ज़्यादा ग्राहकों (apps) को खुश रखने में मदद करता है!तो याद रखो, वर्चुअल RAM वो जादूगर है जो कम RAM वाली दुकान को भी धूम मचाने में मदद करता है!

Virtual RAM से कैसे बढ़ जाती है रैम?

वर्चुअल रैम से आपके फोन की रैम नहीं बढ़ती है, बल्कि यह आपके फोन को एक साथ ज्यादा ऐप्स चलाने में मदद करती है। मान लीजिए कि आपके फोन में 4GB रैम है और आप 5 ऐप्स चला रहे हैं। जब इन 5 ऐप्स में से कोई एक ऐप बंद हो जाता है, तो वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करके उसे स्टोर किया जाता है। अब, आप 6वां ऐप भी चला सकते हैं।

Virtual RAM

Virtual RAM गणित से समझें

वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करके आप अपने फोन में रैम की मात्रा को दोगुना या उससे भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं। मान लीजिए कि आपके फोन में 4GB रैम है और आप वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करके 4GB और रैम जोड़ते हैं। अब, आपके फोन में कुल 8GB रैम हो जाती है।

लेकिन, ध्यान रखें कि वर्चुअल रैम की स्पीड रियल रैम की स्पीड के बराबर नहीं होती है। इसलिए, वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करके आपके फोन की परफॉर्मेंस में थोड़ी कमी आ सकती है।

Virtual RAM कैसे सेट करें?

Virtual RAM सेट करने के लिए आपको अपने फोन के सेटिंग में जाना होगा। फिर, आपको “System” या “Device” के अंदर “Memory” या “Storage” का विकल्प चुनना होगा। यहां आपको “Virtual RAM” का विकल्प दिखाई देगा। इस विकल्प पर क्लिक करके आप वर्चुअल रैम की मात्रा को सेट कर सकते हैं।

Virtual RAM

Virtual RAM का इस्तेमाल करने के फायदे और नुकसान

वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करने के कई फायदे हैं। यह आपको एक साथ ज्यादा ऐप्स चलाने में मदद करती है। साथ ही, यह आपके फोन की रैम को बचाने में भी मदद करती है।

लेकिन, वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करने के कुछ नुकसान भी हैं। वर्चुअल रैम की स्पीड रियल रैम की स्पीड के बराबर नहीं होती है। इसलिए, वर्चुअल रैम का इस्तेमाल करने से आपके फोन की परफॉर्मेंस में थोड़ी कमी आ सकती है।

FAQ- सामान्य प्रश्न (Virtual RAM)

प्रश्न- स्मार्टफोन में ज्यादा रैम होने के क्या फायदे हैं?

उत्तर- ज़रा सोचो, तुम एक व्यस्त मल्टीटास्कर हो. एक हाथ में कॉफी, दूसरे में फोन, एक खबर पढ़ रहे हो, दूसरी तरफ दोस्त से बातें कर रहे हो. कभी फोटो खोलते हो, कभी वीडियो गेम खेलते हो. लेकिन क्या उफनते कामों के बीच कभी दिमाग हंगामा मचाता है? या सबकुछ स्मूथ रहता है?

अब सोचो, ज्यादा रैम वाला स्मार्टफोन भी वही है, वो मल्टीटास्कर वाला दोस्त! बड़ी रैम उसकी तेज दिमाग की तरह काम करती है. वो सारे खुले ऐप्स, चलती हुई चैट्स, गेमिंग का डाटा सबकुछ संभाल लेता है. किसी काम में रुकावट नहीं आती, सब फटाफट होता है.

तो ज्यादा रैम आपके डिजिटल लाइफ में एक कुशल सहायक की तरह है, जो उलझन को सुलझाता है और हर काम को सुचारू बनाता है. समझ गए?

एक लाइन में: मल्टीटास्किंग और परफॉर्मेंस में सुधार।

प्रश्न- वर्चुअल मेमोरी की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर– वर्चुअल मेमोरी की आवश्यकता इसलिए है ताकि कंप्यूटर एक साथ कई ऐप्स और प्रक्रियाओं को चला सके, भले ही उसके पास पर्याप्त भौतिक रैम न हो।

वर्चुअल मेमोरी एक तकनीक है जो हार्ड डिस्क की जगह को रैम की तरह उपयोग करती है। जब कोई ऐप या प्रक्रिया रैम में फिट नहीं होती है, तो इसे वर्चुअल मेमोरी में भेज दिया जाता है। जब ऐप या प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, तो इसे रैम में वापस लाया जाता है।

वर्चुअल मेमोरी के बिना, कंप्यूटर केवल उन ऐप्स और प्रक्रियाओं को चला सकता है जिनके लिए पर्याप्त भौतिक रैम उपलब्ध है। इससे मल्टीटास्किंग मुश्किल हो सकती है, और कंप्यूटर की प्रदर्शन भी प्रभावित हो सकती है।

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